अंतरराष्ट्रीय बार एसोसिएशन संस्थान ने घाना से LGBT-विरोधी विधेयक खारिज करने को कहा
इंटरनेशनल बार एसोसिएशन के मानवाधिकार संस्थान (IBAHRI) ने 23 जुलाई को घाना के अधिकारियों से उस विधेयक को लागू न करने की अपील की, जो LGBT पहचान और LGBT लोगों के समर्थन पर आपराधिक दंड का दायरा बढ़ाता है। पश्चिम अफ्रीकी देश की संसद ने 29 मई 2026 को इसे मंजूर किया था, लेकिन 31 जुलाई तक राष्ट्रपति की स्वीकृति की पुष्टि नहीं हुई थी और यह आगे की कानूनी तथा प्रक्रियात्मक समीक्षा में था। यह जानकारी IBAHRI के बयान में दी गई।
मानव यौन अधिकार और पारिवारिक मूल्य विधेयक के तहत खुद को LGBT बताने वाले व्यक्ति को तीन साल तक की जेल हो सकती है। LGBT-संबंधित गतिविधियों के “प्रचार”, पैरवी, समर्थन या वित्तपोषण के लिए दस साल तक की सजा का प्रावधान है। विधेयक कथित उल्लंघनों की सूचना पुलिस को देना भी अनिवार्य बनाता है।
IBAHRI का कहना है कि ये प्रावधान अभिव्यक्ति, सभा और संगठन की स्वतंत्रता को सीमित कर सकते हैं तथा वकीलों, पत्रकारों, स्वास्थ्यकर्मियों, शिक्षकों और नागरिक संगठनों के काम पर असर डाल सकते हैं। पारित संस्करण में अपने पेशेवर कर्तव्यों के तहत काम करने वाले कुछ लोगों के लिए छूट है, लेकिन संस्थान के अनुसार व्यापक प्रावधान LGBT लोगों को चिकित्सा और कानूनी सहायता लेने से फिर भी रोक सकते हैं।
समर्थकों का कहना है कि यह प्रस्ताव घाना के पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों और सांस्कृतिक मानदंडों की रक्षा करता है। Associated Press के अनुसार , दोनों प्रमुख दलों के सांसद और धार्मिक समूह इसका समर्थन करते हैं। मानवाधिकार संगठनों समेत आलोचकों का कहना है कि यह संवैधानिक स्वतंत्रताओं का उल्लंघन करता है और यौन अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव तथा हिंसा को बढ़ावा दे सकता है।
घाना की संसद ने 2024 में ऐसा ही विधेयक पारित किया था, लेकिन तत्कालीन राष्ट्रपति नाना अकुफो-एडो ने उस पर हस्ताक्षर नहीं किए और संसदीय कार्यकाल खत्म होने पर वह निष्प्रभावी हो गया। राष्ट्रपति जॉन ड्रामानी महामा ने कहा था कि वे नई प्रति के उचित तरीके से पारित होने पर हस्ताक्षर करेंगे, लेकिन जून में उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति की स्वीकृति से पहले अतिरिक्त संवैधानिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।


