फ्रांस में एलजीबीटी संगठनों ने HIV के साथ जी रहे लोगों पर रोजगार संबंधी पाबंदियों को चुनौती दी

छह फ्रांसीसी संगठनों ने 15 अक्टूबर 2026 को पेरिस में देश के सर्वोच्च प्रशासनिक न्यायालय, राज्य परिषद, में याचिका दायर की। उन्होंने HIV के साथ जी रहे लोगों के सेना, जेंडरमेरी, अग्निशमन सेवाओं और नागरिक सुरक्षा के कुछ पदों तक पहुंच पर लगी पाबंदियों को चुनौती दी है। उनका प्रतिनिधित्व कर रही कानूनी फर्म Deshoulières Avocats ने याचिका की जानकारी दी।
गठबंधन में Mousse, STOP Homophobie, Familles-LGBT, Élus locaux contre le Sida (ELCS), FLAG! और SOS Racisme शामिल हैं। उन्होंने 30 जून को ही रक्षा, गृह और स्वास्थ्य मंत्रियों से 12 मंत्रिस्तरीय आदेशों के संबंधित प्रावधान हटाने की मांग की थी। वकीलों के अनुसार, दो महीने तक जवाब न मिलने को निहित अस्वीकृति माना गया। संगठन अब इसी अस्वीकृति को चुनौती दे रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं के वकील एतिएन देज़ूलिएर बताते हैं कि SIGYCOP चिकित्सा प्रणाली सामान्य स्वास्थ्य को G गुणांक से आंकती है, जिसमें G1 सबसे अच्छी श्रेणी है। उनके अनुसार, प्रभावी इलाज और लक्षण न होने के बावजूद HIV के साथ जी रहे व्यक्ति को अधिकतम G2 श्रेणी मिल सकती है। इससे सैन्य पायलट सहित कुछ विशेषज्ञ पदों तक पहुंच बंद हो जाती है। संगठन मानव संसाधन विभागों को भेजे जाने वाले उन स्वास्थ्य आंकड़ों पर भी आपत्ति करते हैं, जिन्हें वे जरूरत से अधिक और गलत मानते हैं।
Boursorama में प्रकाशित AFP की रिपोर्ट के अनुसार, सशस्त्र बल मंत्रालय ने नस्लवाद और समलैंगिकता-विरोध के आरोप खारिज किए। मंत्रालय ने कहा कि HIV के साथ जी रहे लोगों को लगभग सभी सैन्य विशेषज्ञताओं में भर्ती किया जाता है। मंत्रालय के एक सूत्र ने एजेंसी को बताया कि शर्तें सैन्यकर्मियों और अभियानों की सुरक्षा पर आधारित हैं और चिकित्सा प्रगति के साथ मानदंड बदलते रहते हैं।
पिछला विवाद 2020 में शुरू हुआ था। फ्रांस के अधिकार संरक्षक के अनुसार, नियम बदलने के बाद राज्य परिषद ने 21 नवंबर 2023 को संबंधित मांगों पर गुण-दोष के आधार पर फैसला दिए बिना कार्यवाही समाप्त कर दी थी। सुधार से HIV के साथ जी रहे लोगों के लिए सेवा के अवसर बढ़े, लेकिन कुछ पदों पर पाबंदियां बनी रहीं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन पुष्टि करता है कि नियमित रूप से एंटीरेट्रोवायरल दवाएं लेने और वायरल लोड को जांच में पता न चलने वाले स्तर पर बनाए रखने वाला व्यक्ति यौन साथियों को HIV नहीं पहुंचाता। याचिकाकर्ता जोर देते हैं कि वे चिकित्सा जांच समाप्त नहीं कराना चाहते, बल्कि वस्तुनिष्ठ और अनुपातिक मानदंडों से वास्तविक कार्यक्षमता का व्यक्तिगत मूल्यांकन चाहते हैं। याचिका दायर होने से मौजूदा पाबंदियां अपने आप नहीं हटतीं; नए विवाद में फैसला अभी आना बाकी है।


