नाइजर ने पहली बार समलैंगिक संबंधों को अपराध घोषित किया

नाइजर गणराज्य में एक नई दंड संहिता लागू हुई है, जो देश के इतिहास में पहली बार समलैंगिक संबंधों को स्पष्ट रूप से अपराध घोषित करती है। इस दस्तावेज़ पर जनरल अब्दुरहमान तियानी (Abdourahamane Tiani) के नेतृत्व वाली सैन्य सरकार ने हस्ताक्षर किए।

नई संहिता समलैंगिक यौन संबंधों के लिए पाँच से दस वर्ष की कैद और 10 करोड़ CFA फ्रैंक (लगभग 1,64,000 अमेरिकी डॉलर) तक के जुर्माने का प्रावधान करती है । तथाकथित “LGBTQIA+ प्रथाओं” और शल्य-चिकित्सा के माध्यम से लिंग बदलने के प्रयास पर भी दंड का प्रावधान है। समलैंगिक विवाह करने, कराने, अथवा LGBT संगठनों की स्थापना या वित्तपोषण पर 10 से 20 वर्ष की कैद की सज़ा निर्धारित की गई है।

यह संहिता फरवरी 2026 में लागू हुई, लेकिन मीडिया ने इन नए प्रावधानों पर ध्यान जून में तब केंद्रित किया , जब देश की राजधानी में LGBT लोगों के खिलाफ बड़े पैमाने पर छापेमारी की खबरें आईं। इससे पहले, नाइजर में समलैंगिक संबंधों पर कानूनी रूप से कोई स्पष्ट प्रतिबंध नहीं था, हालाँकि एक ऐसे समाज में जहाँ अधिकांश आबादी इस्लाम का पालन करती है, वे वर्जित माने जाते थे।

न्याय मंत्री अलियो दाउदा (Alio Daouda) ने कहा कि सरकार ने यह कानून “पूर्ण संप्रभुता” के साथ पारित किया, क्योंकि समलैंगिक संबंध नाइजर के सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों के विरुद्ध हैं। जुलाई 2023 के तख्तापलट के बाद सैन्य सरकार ने पश्चिम-विरोधी रुख अपनाया है और अक्सर विदेशी मूल्यों की आलोचना करती है। दंड संहिता में सुधार की प्रक्रिया पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद बज़ूम (Mohamed Bazoum) के कार्यकाल में मुस्लिम संगठनों के दबाव में शुरू हुई थी, लेकिन नई सरकार ने अंततः इस कानून को मंजूरी दी।

नाइजर पश्चिम अफ्रीका में समलैंगिकता-विरोधी कानूनों को कड़ा करने की प्रवृत्ति में शामिल हो गया है। हाल ही में इस क्षेत्र के अन्य देशों ने भी इसी तरह के प्रतिबंध अपनाए हैं। उदाहरण के लिए, पड़ोसी बुर्किना फासो ने भी समलैंगिक संबंधों पर प्रतिबंध लगाया है, और पिछले महीने सेनेगल ने समलैंगिक कृत्यों के लिए अधिकतम कारावास की सज़ा दोगुनी कर दी।