रूसी अदालत ने "समानता के लिए विषमलैंगिकों और LGBT का गठबंधन" को उग्रवादी घोषित किया
सेंट पीटर्सबर्ग की एक नगर अदालत ने मानवाधिकार समूह “समानता के लिए विषमलैंगिकों और LGBT का गठबंधन” को “उग्रवादी संगठन” घोषित कर उसकी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह याचिका रूस के न्याय मंत्रालय द्वारा दाखिल की गई थी। मुकदमे की सुनवाई बंद कमरे में हुई।
“पर्वी ओत्देल” (Pervy Otdel) परियोजना के मानवाधिकार रक्षकों के अनुसार, अदालत ने केवल दो सुनवाइयों में ही न्याय मंत्रालय की मांगें मान लीं। याचिका का आधार 2023 के अंत में रूस के सर्वोच्च न्यायालय का वह फैसला था, जिसमें काल्पनिक “अंतरराष्ट्रीय LGBT सार्वजनिक आंदोलन” को उग्रवादी करार देकर देश में उसकी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया था।
“समानता के लिए विषमलैंगिकों और LGBT का गठबंधन” की स्थापना 2012 में सेंट पीटर्सबर्ग में “LGBT प्रचार” पर प्रतिबंध लगाने की मुहिम के विरोध में की गई थी। यह रूस में “उग्रवादी संगठन” का दर्जा पाने वाली दसवीं LGBT पहल है। इससे पहले अदालतें रूसी LGBT नेटवर्क, “वॉस्खोद” (Vykhod — “Coming Out”) केंद्र, “पार्नी+” (Parni+), “सेंटर टी” (Center T), “LGBT रिसोर्स सेंटर” और अन्य समूहों के बारे में इसी तरह के फैसले सुना चुकी हैं।
जैसा कि The Insider ने उल्लेख किया है, ऐसे मामलों की सामग्री में अधिकारी “उग्रवादी गतिविधि” के संकेत के रूप में गैर-द्विआधारी (non-binary) लोगों के लिए बैठकें आयोजित करने या अंतरराष्ट्रीय कमिंग-आउट दिवस से जुड़े कार्यक्रमों जैसी गतिविधियों का हवाला देते हैं। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद 2026 से रूस में LGBT कार्यकर्ताओं के खिलाफ दमन और तेज हो गया है।