तुर्की LGBT संगठन "17 मई" की अध्यक्ष देफ्ने गुज़ेल "सार्वजनिक नैतिकता" मामले में बरी

12 मई 2026 को अंकारा की एक प्रथम दृष्टांत अदालत ने तुर्की LGBT संगठन “17 मई” के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की अध्यक्ष देफ्ने गुज़ेल (Defne Güzel) को बरी कर दिया। उन पर संगठन की वेबसाइट पर इंटरसेक्स लोगों से संबंधित एक अनुवादित पुस्तिका प्रकाशित करने के कारण “सार्वजनिक नैतिकता के उल्लंघन” का आरोप लगाया गया था।

गुज़ेल के विरुद्ध यह मामला 2024 में तुर्की के गृह मंत्रालय के एक नियमित निरीक्षण के बाद दर्ज किया गया था। निरीक्षकों का ध्यान My Intersex Story नामक अनुवादित पुस्तिका पर गया। अभियोजन पक्ष का मानना था कि इस प्रकाशन से सार्वजनिक नैतिकता के मानकों का उल्लंघन होता है।

पहली सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने गुज़ेल से पूछा कि “इंटरसेक्सुअलिटी” शब्द का क्या अर्थ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उन लोगों को संदर्भित करता है जो लिंग संबंधी शारीरिक विशेषताओं की विविधता के साथ जन्म लेते हैं, और उन्होंने प्रकाशन के शैक्षिक उद्देश्य पर भी जोर दिया। गुज़ेल ने यह भी बताया कि अभियोजन पक्ष द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ को पुस्तिका में अपराध का कोई तत्व नहीं मिला।

अभियोजक ने बचाव पक्ष का समर्थन करते हुए आपराधिक मंशा की अनुपस्थिति और अपर्याप्त साक्ष्य का हवाला देकर गुज़ेल की रिहाई की मांग की। वकील ओया अयदीन (Oya Aydın) ने आरोप को निराधार बताते हुए कहा कि किसी मानवाधिकार संगठन की वेबसाइट पर कलात्मक और साहित्यिक सामग्री प्रकाशित करना अपराध नहीं माना जा सकता।

अपने बयान में देफ्ने गुज़ेल ने कहा कि उन पर मुकदमा न केवल संगठन की प्रमुख के रूप में, बल्कि एक ट्रांस महिला और मानवाधिकार रक्षक के रूप में भी चलाया जा रहा था। उन्होंने इस मुकदमे को संविधान द्वारा प्रदत्त संगठन की स्वतंत्रता और नागरिक समाज की गतिविधियों पर हमला बताया।

सुनवाई में तुर्की में EU प्रतिनिधिमंडल के प्रतिनिधि, यूके, फ्रांस, जर्मनी और अन्य यूरोपीय देशों के राजनयिक, तथा Amnesty International और Kaos GL सहित स्थानीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के सदस्य उपस्थित थे। सीटों की सीमित संख्या के कारण सभी इच्छुक लोगों को कोर्टरूम में प्रवेश नहीं मिल सका।