पीटर प्रथम की यौनिकता: पत्नियाँ, प्रेमिकाएँ, पुरुष और मेंशिकोव से संबंध

क्या रूस के पहले सम्राट उभयलैंगिक थे? या वे केवल महिलाओं से प्रेम करते थे?

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शृंखला 🇷🇺 रूस का LGBT इतिहास
पीटर प्रथम की यौनिकता: पत्नियाँ, प्रेमिकाएँ, पुरुष और मेंशिकोव से संबंध

पीटर प्रथम इतिहास में ऐसे सुधारक के रूप में दर्ज हैं जिन्होंने पुरानी व्यवस्था को आमूलचूल बदल दिया। उनका निजी जीवन भी जटिल और अंतर्विरोधों से भरा था।

पीटर के युग के अनेक स्रोत बचे हुए हैं: पत्र, डायरियाँ, संस्मरण और दरबार में रहने वाले विदेशियों के विवरण। इनसे पता चलता है कि पुरुषों से ज़ार के संभावित संबंधों की अफ़वाहें व्यापक रूप से प्रचलित थीं। लेकिन अनेक इतिहासकारों ने या तो इस विषय को टाला या इसे सिरे से नकार दिया।

इस लेख के पहले भाग में पीटर की जीवनी के मुख्य तथ्यों और महिलाओं — पत्नियों तथा प्रेमिकाओं — से उनके संबंधों की चर्चा की गई है।

🏳️‍🌈 दूसरे भाग में पुरुषों से पीटर प्रथम के संभावित संबंधों के बारे में सभी दस्तावेज़ों और अफ़वाहों पर विचार करेंगे: संस्मरण, डायरियाँ, पत्र और अभिलेखागार की सामग्री।

जन्म, बचपन और व्यक्तित्व का निर्माण

पीटर का जन्म 9 जून 1672 को मॉस्को में हुआ। उनकी माँ नताल्या किरिल्लोव्ना नारीश्किना ज़ार अलेक्सेई मिखाइलोविच की दूसरी पत्नी थीं; बेटे के जन्म के समय उनकी उम्र 21 वर्ष थी। राजपरिवार के दूसरे बच्चों की तरह पीटर का बचपन भी दाइयों और सेवकों की देखरेख में बीता।

पीटर चार वर्ष के थे जब उनके पिता की मृत्यु हुई। ज़ार अचानक बीमार पड़े और उनका निधन हो गया। अलेक्सेई मिखाइलोविच की पहली शादी से जन्मे बेटे फ़्योदोर सिंहासन पर बैठे। वे गंभीर रूप से बीमार रहते थे: उनके पैरों में लगातार सूजन बनी रहती थी।

फ़्योदोर का शासन लंबा नहीं चला और 1682 में उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद दरबार में पीटर के ननिहाल नारीश्किन परिवार और ज़ार की पहली पत्नी के संबंधियों मिलोस्लाव्स्की परिवार के बीच सत्ता का संघर्ष शुरू हुआ। सवाल उठा कि इवान ज़ार बनें या पीटर। पिता की ओर से पीटर के बड़े भाई इवान की सेहत भी कमज़ोर थी।

मई 1682 में मॉस्को में विद्रोह भड़क उठा। मिलोस्लाव्स्की परिवार ने स्त्रेल्त्सी सैनिकों को यक़ीन दिलाया कि नारीश्किन परिवार ने इवान की हत्या कर दी है। क्रेमलिन में घुसे सैनिकों ने इवान को जीवित देखा। लेकिन हिंसा को अब रोकना संभव नहीं था: उन्होंने ख़ून की माँग की और पीटर के निकटवर्ती लोगों समेत कई बोयार अभिजातों की हत्या कर दी। पीटर को यह घटना जीवन भर याद रही और बाद में उन्होंने इसका बदला लिया।

विद्रोह के बाद दोनों भाइयों को ज़ार घोषित किया गया। जब तक वे स्वयं शासन करने में सक्षम नहीं हुए, देश का प्रशासन उनकी बड़ी बहन सोफ़्या को सौंपा गया, जो संरक्षिका बन गईं।

पीटर को अच्छी शिक्षा नहीं मिली। शिक्षकों ने उन्हें केवल पढ़ने-लिखने की बुनियादी जानकारी दी और वे जीवन भर लिखने में ग़लतियाँ करते रहे। लेकिन बहुत कम उम्र से ही उन्हें शिल्पों में रुचि थी। उन्होंने बढ़ईगिरी, लकड़ी का बारीक काम और लोहार का काम सीखा, जो किसी रूसी ज़ार के लिए लगभग अकल्पनीय था।

उनकी सबसे अधिक रुचि सेना और समुद्र में थी। प्रेओब्राझेन्स्कोये गाँव में वे अभ्यास के लिए युद्ध आयोजित करते थे। औपचारिक रूप से इन्हें खेल माना जाता था, लेकिन वास्तव में इनमें असली बंदूकें और तोपें इस्तेमाल होती थीं और सब कुछ काफ़ी गंभीर रूप ले लेता था।

उस समय रूस में नियमित रूप से जहाज़ नहीं बनाए जाते थे। पीटर ने नौकायन और समुद्री काम की व्यावहारिक जानकारी विदेशियों से हासिल की, इसलिए वे मॉस्को की उस बस्ती में अधिक आने-जाने लगे जहाँ यूरोपीय रहते थे और जिसे नेमेत्स्काया स्लोबोदा, अर्थात जर्मन बस्ती, कहा जाता था। यह नाम सटीक नहीं था: उस समय रूस में केवल जर्मन प्रदेशों से आए लोगों को ही नहीं, बल्कि सामान्यतः विदेशियों को भी अक्सर «जर्मन» कहा जाता था।

1694 में पीटर की माँ की मृत्यु हुई। परंपरा के विपरीत वे औपचारिक अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए। उन्होंने अपना दुख अकेले सहा और बाद में गुप्त रूप से उनकी क़ब्र पर शोक मनाया। उनके व्यक्तित्व की यह विशेषता तभी दिखाई देने लगी थी: रस्मों के प्रति तिरस्कार के साथ गहरी, लेकिन छिपी हुई भावनाएँ।

शासन का संक्षिप्त विवरण

विस्तार में न जाएँ तो पीटर के शासन की मुख्य घटनाओं को इस प्रकार गिनाया जा सकता है।

1697–1698 का «महान दूतमंडल» पीटर और उनके साथियों की लंबी यूरोप यात्रा थी। इससे उन्हें यूरोपीय तकनीक, सेना, शासन-व्यवस्था और दैनिक जीवन की जानकारी मिली।

इसके बाद रूसी साम्राज्य की स्थापना, सैन्य सुधार और स्वीडन के विरुद्ध 1700–1721 के उत्तरी युद्ध में विजय आई। इस जीत ने बाल्टिक सागर तक रूस की पहुँच सुनिश्चित की। फिर पूर्व की ओर विस्तार शुरू हुआ और कैस्पियन अभियान चला, जिसके बाद रूस ने एक बड़ी शक्ति के रूप में अपनी उपस्थिति और स्पष्ट कर दी।

पीटर लगभग हर क्षेत्र में देश का पुनर्गठन कर रहे थे। उन्होंने नियमित थलसेना और नौसेना बनाई, शासन-व्यवस्था बदली तथा शिक्षा और संस्कृति को प्रभावित किया। इस नीति के लिए कठोर निर्णय ज़रूरी थे और इसका असर उनके व्यक्तित्व पर भी पड़ा। सत्ता और युद्ध के लगातार दबाव ने उन्हें क्रूर, शंकालु और आलोचना के प्रति असहिष्णु बना दिया।

लोगों को चुनने का उनका तरीक़ा भी महत्त्वपूर्ण था। पीटर वंश के बजाय क्षमता को महत्त्व देते थे। उनके ननिहाल के कुछ संबंधी विद्रोह में मारे गए थे; पत्नी के संबंधियों को वे नज़रअंदाज़ करते थे; बचपन के उनके क़रीबी मित्र बड़े अभिजात परिवारों के नहीं थे। उनके शासन में साधारण पृष्ठभूमि के लोग, विदेशी और दूसरे धर्मों के अनुयायी भी सर्वोच्च पदों तक पहुँच सकते थे, यदि पीटर उन्हें उपयोगी और प्रतिभाशाली मानते।

पीटर प्रथम में सुधारक और निरंकुश शासक, पुरानी व्यवस्था को तोड़ने वाला और नई व्यवस्था का निर्माता, दोनों मौजूद थे।

पीटर प्रथम का रूप और स्वभाव

«ज़ार पीटर अलेक्सेयेविच लंबे क़द के थे, भरे-पूरे से अधिक दुबले; उनके बाल घने, छोटे और गहरे चेस्टनट रंग के थे, आँखें बड़ी और काली, पलकें लंबी, मुँह का आकार अच्छा था, हालाँकि निचला होंठ कुछ बिगड़ा हुआ था; चेहरे का भाव सुंदर था और पहली नज़र में ही सम्मान पैदा करता था।»

— इतालवी गायक फ़िलिप्पो बालात्री, 1698

गॉडफ़्रीड शाल्केन, «ज़ार पीटर अलेक्सेयेविच का चित्र»

«ज़ार बहुत लंबे हैं, उनका चेहरा बहुत सुंदर है और वे बेहद सुडौल हैं। लेकिन प्रकृति ने उन्हें जो अद्भुत गुण दिए हैं, उनके साथ यह इच्छा भी होती है कि उनके तौर-तरीक़े कुछ कम खुरदरे होते… उन्होंने हमें बताया कि वे स्वयं जहाज़ बनाने का काम करते हैं, अपने हाथ दिखाए और हमें उनके गट्टे छूने को कहा। […] जहाँ तक उनके चेहरे की ऐंठन [दौरों] की बात है, मैंने उन्हें वास्तविकता से कहीं अधिक बुरा समझा था, और कुछ पर नियंत्रण कर पाना उनके बस में नहीं है। यह भी साफ़ है कि उन्हें साफ़-सुथरे ढंग से खाना नहीं सिखाया गया, लेकिन मुझे उनकी स्वाभाविकता और सहजता अच्छी लगी; वे ऐसे बर्ताव करने लगे जैसे अपने घर में हों।»

— ब्रांडेनबुर्ग की निर्वाचक रानी सोफ़ी शार्लोट ऑफ़ हैनोवर, पीटर प्रथम से मुलाक़ात के बारे में

याकोपो अमीगोनी, «रूस के सम्राट पीटर प्रथम»

«सुबह महामहिम बहुत जल्दी उठते हैं, और मैंने उन्हें कई बार एकदम सुबह के समय तटबंध पर राजकुमार मेंशिकोव, एडमिरलों, एडमिरल्टी या रस्सी बनाने के कारख़ाने की ओर जाते देखा है। वे लगभग दोपहर को भोजन करते हैं, चाहे कहीं भी हों और किसी के भी घर हों, लेकिन सबसे अधिक मंत्रियों, सेनापतियों या राजदूतों के यहाँ खाना पसंद करते हैं… भोजन के बाद रूसी प्रथा के अनुसार लगभग एक घंटे आराम करके ज़ार फिर काम में लग जाते हैं और बहुत देर रात सोते हैं। उन्हें ताश, शिकार और ऐसी दूसरी चीज़ें पसंद नहीं; दूसरे सभी सम्राटों से उन्हें बिल्कुल अलग करने वाला उनका एकमात्र मनोरंजन पानी पर यात्रा करना है।»

— «1710 और 1711 में सेंट पीटर्सबर्ग और क्रोनश्टाड्ट का वर्णन» नामक पुस्तिका के अज्ञात लेखक

पहली शादी: येवदोकिया लोपुखिना

सत्रह वर्ष का होने तक पीटर को शादी करनी थी — उनकी माँ ज़ारिना नताल्या किरिल्लोव्ना का यही निर्णय था। उस समय की धारणाओं के अनुसार विवाह वयस्क जीवन में प्रवेश का प्रतीक था और युवक को अधिक स्वतंत्रता देता था। पीटर के लिए यह राजकुमारी सोफ़्या की स्थिति कमज़ोर करने का भी एक साधन था, जो संरक्षिका के रूप में वास्तव में शासन अपने हाथों में रखे हुए थीं।

पीटर की पत्नी येवदोकिया लोपुखिना बनीं — कुलीन और सुंदर, लेकिन पुरानी मॉस्को परंपराओं में पली-बढ़ी हुई। जल्दी ही दोनों की सोच में दूरी पैदा हो गई। आरंभ में शायद उनमें लगाव था, लेकिन शादी के लगभग एक महीने बाद ही पीटर अपने जहाज़ों और कामों की ओर चले गए। पत्नी की आज्ञाकारिता और पुरानी व्यवस्था के प्रति उनका लगाव पीटर को ऊब और चिढ़ से भर देता था।

1690 में उनके बेटे अलेक्सेई का जन्म हुआ, लेकिन इससे परिवार मज़बूत नहीं हुआ। महान दूतमंडल की यात्रा से यूरोप से प्रेरित होकर लौटे पीटर ने येवदोकिया को मठ में जाने के लिए मजबूर किया। इस तरह उन्होंने वास्तव में अपना वैवाहिक संबंध तोड़ दिया।

ज़ारिना येवदोकिया फ़्योदोरोव्ना, जन्मनाम लोपुखिना, पीटर प्रथम की पहली पत्नी

प्रेमिका अन्ना मॉन्स से संबंध

जर्मन बस्ती में पीटर प्रथम की मुलाक़ात शराब के व्यापारी की बेटी अन्ना मॉन्स से हुई। लंबे समय तक वही उनकी प्रमुख प्रेमिका रहीं। अन्ना ख़ुशमिज़ाज और हाज़िरजवाब थीं, नृत्य और बातचीत पसंद करती थीं तथा पुरानी मॉस्को परंपराओं में पली येवदोकिया से बिल्कुल अलग थीं।

ज़ार मॉन्स परिवार के घर अधिक आने-जाने लगे। येवदोकिया ने पति को वापस लाने का प्रयास किया और उन्हें मार्मिक पत्र लिखे।

«सलाम, मेरे प्रकाश, आपकी आयु लंबी हो। हम आपकी कृपा चाहते हैं, कृपया महाराज, बिना देर किए हमारे पास आइए। मैं माँ की कृपा से जीवित हूँ। आपकी पत्नी दुन्का आपको सिर झुकाकर प्रणाम करती है।»

— येवदोकिया लोपुखिना, पीटर प्रथम को लिखे पत्र में

लेकिन इन पत्रों का कोई उत्तर नहीं आया। पीटर को अब परिवार से लगाव नहीं रहा था।

अन्ना मॉन्स दस वर्ष से अधिक समय तक ज़ार की प्रेमिका रहीं। विवरण से लगता है कि उनके लिए यह संबंध पीटर जितना महत्त्वपूर्ण नहीं था। समय के साथ अन्ना का एक और प्रशंसक बन गया — प्रशा का राजदूत गेओर्ग-योहान कैज़रलिंग। इसका पता चलने पर पीटर क्रोधित हो गए और अन्ना को घर में नज़रबंद कर दिया गया।

पीटर की कैज़रलिंग से मुलाक़ात हुई। राजदूत के अपने कथन के अनुसार ज़ार ने कहा कि उन्होंने «युवती मॉन्स को अपने लिए पाला था और उससे विवाह करने की सच्ची इच्छा रखते थे, लेकिन चूँकि उसने उसे बहकाया और भ्रष्ट कर दिया है, इसलिए वे न उसके बारे में, न उसके संबंधियों के बारे में कुछ सुनना या जानना चाहते हैं»।

पीटर के सबसे निकटवर्ती सहयोगी मेंशिकोव ने जोड़ा कि मॉन्स «एक नीच वेश्या है, जिसके साथ उसने स्वयं भी उतना ही व्यभिचार किया है जितना कैज़रलिंग ने»। इसके बाद मेंशिकोव के सेवकों ने राजनयिक को पीटा और सीढ़ियों से नीचे फेंक दिया।

इस हंगामे के बावजूद कैज़रलिंग अपने उद्देश्य में सफल रहे: 1711 में उनका अन्ना से विवाह हो गया। लेकिन छह महीने बाद ही उनकी मृत्यु हो गई। अन्ना ने जीवन फिर से बसाने की कोशिश की, लेकिन जल्द ही ख़ुद भी क्षय रोग से मर गईं — उस समय तपेदिक को यही कहा जाता था।

पीटर से अन्ना मॉन्स के गर्भवती होने की कोई जानकारी नहीं है।

एक अज्ञात महिला का चित्र, जिसे संभवतः अन्ना मॉन्स माना जाता है

दूसरी शादी: येकातेरीना प्रथम

1711 में, स्वीडन के साथ युद्ध के बीच, पीटर प्रथम ने घोषणा की कि उनकी एक नई पत्नी है — येकातेरीना।

पीटर से पहले रूस में राजाओं के विवाहेतर संबंधों को सहन किया जाता था। लेकिन ज़ार का अपने सामाजिक वर्ग से बाहर की महिला से औपचारिक विवाह लगभग असंभव समझा जाता था। ज़ार को केवल शासक नहीं, बल्कि पवित्र व्यक्ति भी माना जाता था, जिसके आसपास उचित आचरण और व्यवस्था की धारणाएँ जुड़ी थीं। इसलिए एक पूर्व बंदिनी से उनका विवाह कांड जैसा दिखाई देता था। लेकिन पीटर इससे नहीं रुके।

बपतिस्मा से पहले येकातेरीना का नाम मार्ता था। उनका जन्म लिवोनिया में हुआ था — ऐसा इलाक़ा जिसका अधिकतर हिस्सा आज लातविया और एस्तोनिया में है। उनकी माँ एक कुलीन व्यक्ति की प्रेमिका थीं, लेकिन मार्ता जल्दी ही अनाथ हो गईं और एक लूथरन पादरी के घर पहुँच गईं।

1702 में मारिएनबुर्ग की घेराबंदी के दौरान रूसी सैनिकों ने मार्ता को बंदी बना लिया। यह नगर आज लातविया का अलूक्सने है। पहले वे एक छोटे सैन्य अधिकारी के पास पहुँचीं, फिर सेनापति शेरेमेतेव और बाद में अलेक्सांद्र मेंशिकोव के पास। 1703 में पीटर ने उन्हें मेंशिकोव के घर देखा और अपने पास ले गए। विवरण से लगता है कि पहले मेंशिकोव की रखैल रह चुकी होने से पीटर को कोई आपत्ति नहीं हुई।

ऑर्थोडॉक्स ईसाई धर्म स्वीकार करने के बाद मार्ता येकातेरीना बन गईं। उन्होंने पीटर के कई बच्चों को जन्म दिया और धीरे-धीरे उनके जीवन में विशेष स्थान बना लिया। येकातेरीना केवल प्रेमिका नहीं थीं: वे क्रोध के दौरों में ज़ार को शांत कर सकती थीं और गंभीर ऐंठन सहने में उनकी मदद करती थीं।

1711 में पीटर ने बिना अधिक शोर-शराबे के उनसे विवाह कर लिया और 1724 में औपचारिक रूप से उनका राज्याभिषेक किया। इस तरह पूर्व «जर्मन नौकरानी» आगे चलकर साम्राज्ञी येकातेरीना प्रथम और रूसी साम्राज्य की पहली महिला शासक बनीं।

अन्ना मॉन्स के विपरीत येकातेरीना शारीरिक रूप से मज़बूत थीं और लगभग हमेशा पीटर के साथ रहती थीं — सैन्य अभियानों में, जहाज़ों के जलावतरण पर और सैन्य निरीक्षणों में। समकालीनों को याद था कि वे सत्ता का प्रतीक भारी राजदंड आसानी से थाम लेती थीं, जो इतना वज़नी था कि सेवक तक उसे सँभाल नहीं पाते थे।

पीटर के येकातेरीना को लिखे 170 पत्र सुरक्षित हैं। वे उन्हें आत्मीयता से लिखते थे; पत्र «कातेरिनुष्का, मेरी मित्र» जैसे शब्दों से शुरू हो सकते थे।

«भगवान के लिए, जल्दी आ जाइए; और यदि किसी वजह से जल्दी आना संभव न हो तो लिखिए, क्योंकि न आपको सुन पाना, न देख पाना मुझे दुखी करता है।»

— पीटर प्रथम, येकातेरीना को लिखे पत्र में

अज्ञात कलाकार, रूस की येकातेरीना प्रथम का चित्र

अन्ना मॉन्स के पतन से उनके भाई के करियर को कोई नुक़सान नहीं हुआ। विलेम मॉन्स भी सुंदर और आकर्षक थे; उन्होंने दरबार में तरक़्क़ी की और येकातेरीना प्रथम के सबसे विश्वसनीय व्यक्ति बन गए। साम्राज्ञी से अपनी निकटता का लाभ उठाकर वे रिश्वत के बदले दूसरों को उनसे मिलवाते थे। इसका असर पीटर के फ़ैसलों पर भी पड़ता था: शासिका तक पहुँच नियंत्रित करने वाला व्यक्ति अनिवार्य रूप से अर्ज़ियों, अफ़वाहों और उनके आसपास के माहौल को भी प्रभावित करता है।

यह व्यवस्था आगे भी चल सकती थी, यदि दरबार के लिए ख़तरनाक एक घटना सामने न आती: विलेम का येकातेरीना से गुप्त प्रेम-संबंध था।

मामले का अंत एक मुख़बिरी से शुरू हुआ। नवंबर 1724 में पीटर, जिन्हें मॉन्स के घोटालों की जानकारी हो चुकी थी, ने पारिवारिक रात्रिभोज आयोजित किया। मेज़ पर येकातेरीना और विलेम स्वयं बैठे थे। एक समय ज़ार ने पूछा कि कितने बजे हैं। येकातेरीना ने पीटर द्वारा उपहार में दी गई घड़ी देखी और कहा:

— नौ।

पीटर ने चुपचाप घड़ी ली, उसकी सुइयाँ घुमाईं और ठंडे स्वर में कहा:

— आप ग़लत हैं। आधी रात है। सबके सोने का समय हो गया।

मेहमान चले गए। कुछ मिनट बाद मॉन्स को गिरफ़्तार कर लिया गया। पूछताछ में उन्होंने बिना यातना दिए ही सब कुछ स्वीकार कर लिया। लेकिन औपचारिक आरोप केवल रिश्वतख़ोरी का था: येकातेरीना का नाम नहीं लिया गया। सज़ा एक ही थी — मृत्युदंड।

फाँसी वाले दिन येकातेरीना शांत बनी रहीं, लेकिन फ़्रांसीसी राजदूत काम्प्रेदों ने पेरिस को सूचना दी:

«हालाँकि महारानी जितना संभव है अपना दुख छिपाती हैं, लेकिन वह उनके चेहरे पर लिखा हुआ है।»

— फ़्रांस के राजदूत काम्प्रेदों

इसके बाद पीटर ने दिखावेपूर्ण क्रूरता बरती: उन्होंने मृत व्यक्ति के सिर को शराब में सुरक्षित कर येकातेरीना के कक्ष में रखने का आदेश दिया। इसके बाद उनके संबंधों में काफ़ी ठंडापन आ गया। पीटर कुलीन मोल्दावियाई परिवार की अपनी प्रेमिका मारिया कान्तेमिर के साथ समय बिताते थे और पत्नी से लगभग बात नहीं करते थे।

पीटर की मृत्यु से एक महीने पहले, जनवरी 1725 में ही दंपती के बीच सुलह हुई।

बाद में एक किंवदंती बनी कि मरते हुए पीटर ने अपने उत्तराधिकारी का नाम लिखने की कोशिश की, लेकिन हाथ की ताक़त जाती रही और वे केवल «सब कुछ दे दो…» लिख पाए; बात अधूरी रह गई। आगे राजनीति निर्णायक साबित हुई। मेंशिकोव की भूमिका बड़ी थी: संकट के समय उन्होंने येकातेरीना का समर्थन किया और इसी की बदौलत वे सिंहासन पर बैठीं।

दूसरी प्रेमिकाएँ

पीटर प्रथम अपने अनेक प्रेम-संबंधों के लिए प्रसिद्ध थे। दरबार के उनके निजी चिकित्सक डॉक्टर एरेस्किन ने एक बार व्यंग्य में कहा था कि ज़ार के भीतर जैसे «कामवासना के राक्षसों की पूरी सेना» बसी हो — प्रेम-संबंधों की एक अनियंत्रित ललक।

महान दूतमंडल की यात्रा के दौरान पीटर सामान्यतः मनोरंजन से दूर रहे। अपवाद लंदन था, जहाँ अभिनेत्री लेटिशिया क्रॉस से उनका थोड़े समय का संबंध रहा। यह संबंध जल्दी समाप्त हो गया। रवाना होने से पहले पीटर ने उन्हें 500 पाउंड का «उपहार» दिया। क्रॉस ने कहा कि उन्हें अधिक रकम की उम्मीद थी, लेकिन पीटर केवल मुस्करा दिए: उनके अनुसार उन्होंने पहले ही ज़रूरत से अधिक उदारता दिखाई थी।

«…सम्राट कभी-कभी किसी सुंदरी से बातचीत करना पसंद करते थे, लेकिन आधे घंटे से ज़्यादा नहीं। सच है, महामहिम को स्त्रियाँ पसंद थीं, लेकिन वे किसी एक स्त्री से आसक्त नहीं होते थे और प्रेम की आग जल्द बुझा देते थे; कहते थे: “सैनिक को विलासिता में डूबना नहीं चाहिए; स्त्री के लिए कर्तव्य भूलना अक्षम्य है। प्रेमिका का बंदी होना युद्ध का बंदी होने से बुरा है: शत्रु से जल्दी मुक्ति मिल सकती है, लेकिन स्त्री की बेड़ियाँ लंबे समय तक रहती हैं।” जो स्त्री मिलती और पसंद आती, वे उससे संबंध बनाते, लेकिन हमेशा उसकी सहमति से और बिना ज़बरदस्ती के।»

— आंद्रेई नार्तोव

उस समय के यूरोप में राजाओं के प्रेम-संबंधों से किसी को आश्चर्य नहीं होता था। दरबार की स्थायी प्रेमिकाएँ, जिन्हें फ़ेवरिट कहा जाता था, दरबारी जीवन का सामान्य हिस्सा थीं। पोलैंड के राजा ऑगस्टस द्वितीय द स्ट्रॉन्ग इसका उल्लेखनीय उदाहरण हैं, जिनके 354 विवाहेतर बच्चे होने की बात कही जाती थी। समाज इसे अपमान के बजाय शासक की शक्ति का संकेत मानता था: वह युवा, ऊर्जावान और महिलाओं को जीतने में सक्षम है।

रूस में भी सामान्यतः ऐसा ही नज़रिया था। पीटर के प्रेम-संबंधों ने न अभिजात वर्ग में बड़ा हंगामा पैदा किया, न चर्च में। बल्कि उनके आसपास के लोग भी अक्सर यही जीवनशैली अपना लेते थे। उदाहरण के लिए, राजकुमार इवान त्रुबेत्स्कोय ने स्वीडिश बंदी बनने पर स्वयं को विधुर बताया और एक प्रेमिका बना ली।

लेकिन विवरण के अनुसार पीटर स्वयं कभी-कभी अपने प्रेम-संबंधों को लेकर संकोच करते थे और उनका मज़ाक बनाया जाना पसंद नहीं करते थे। 1716 में सैक्सनी के मंत्री फ़्लेमिंग ने डेनमार्क के राजा के साथ पीटर प्रथम के भोजन का वर्णन किया। काफ़ी शराब पीने के बाद डेनमार्क के सम्राट ने उन्हें छेड़ने का निश्चय किया:

— भाई, मैंने सुना है कि आपकी भी एक प्रेमिका है!

पीटर को मज़ाक अच्छा नहीं लगा और उन्होंने तीखे स्वर में उत्तर दिया:

— भाई, मेरी प्रेमिकाओं पर मेरा बहुत ख़र्च नहीं होता; आपकी वेश्याओं पर आपके हज़ारों थालर ख़र्च होते हैं, जिन्हें आप कहीं बेहतर काम में लगा सकते थे।

मेंशिकोव ने दरबार में युवतियों का एक समूह इकट्ठा किया। उनमें उनकी पत्नी की बहन वारवारा भी थीं। वे ज़ार के साथ अपनी स्थिति और मज़बूत करने के लिए वारवारा को उनके निकट लाना चाहते थे। लिखा गया है कि वारवारा सुंदर नहीं मानी जाती थीं, लेकिन बुद्धिमान थीं।

विदेशी विल्बोआ ने भोजन के दौरान की एक घटना का वर्णन किया। उनके अनुसार पीटर ने वारवारा से कहा: «मुझे नहीं लगता कि कोई तुम पर मोहित होगा, बेचारी वार्या, तुम बहुत बदसूरत हो; लेकिन मैं तुम्हें प्रेम का अनुभव किए बिना मरने नहीं दूँगा।» फिर इस स्रोत का दावा है कि ज़ार ने «वहीं सबके सामने उसे सोफ़े पर गिरा दिया और अपना वादा पूरा किया»।

येकातेरीना प्रथम पति के प्रेम-संबंधों को शांति से लेती थीं। इस विवरण के अनुसार कभी-कभी वे स्वयं भी उनके लिए प्रेमिकाएँ चुनती थीं, क्योंकि वे इन संबंधों को तुच्छ मनोरंजन मानती थीं, जिनसे उनके विवाह को कोई ख़तरा नहीं था। केवल राजकुमारी मारिया कान्तेमिर उन्हें सचमुच चिंतित करती थीं।

मारिया कुलीन परिवार की थीं। उनके पिता, मोल्दाविया-वलाखिया के राजकुमार दिमित्री कान्तेमिर, 1711 में तुर्कों से पराजय के बाद पीटर्सबर्ग आ गए और पीटर के निकटवर्ती मंडल में शामिल हुए। 1722 में पता चला कि मारिया ज़ार के बच्चे की माँ बनने वाली हैं। यदि बेटा पैदा होता, तो इससे दरबार का शक्ति-संतुलन बदल सकता था: मारिया राजपरिवार से थीं और अभिजातों को येकातेरीना की तुलना में अधिक उपयुक्त ज़ारिना लग सकती थीं। लेकिन उनका गर्भपात हो गया।

महिलाओं से ज़ार के प्रेम-संबंधों की चर्चा करने की सज़ा

साधारण लोग अक्सर ज़ार की प्रेमलोलुपता की निंदा करते थे। लेकिन पीटर के युग में सम्राट के बारे में असावधान शब्द उनके लिए बहुत भारी पड़ सकते थे। राजनीतिक जाँच, पूछताछ और «राजद्रोह के मामलों» को देखने वाली संस्था प्रेओब्राझेन्स्की प्रिकाज़ के अभिलेखागार में ऐसी बातचीत के दस्तावेज़ सुरक्षित हैं।

1701 में पूर्व पादरी निकीफ़ोर प्लेखानोव्स्की ने किसान दानिला कुज़्मिन के ख़िलाफ़ मुख़बिरी की। इस शिकायत के अनुसार कुज़्मिन अफ़वाह फैला रहे थे कि पीटर ने पत्नी को जबरन मठ में भेज दिया, स्वयं जर्मन महिलाओं के साथ «व्यभिचार» करते थे और उन्हें यात्राओं पर भी साथ ले जाते थे। एक और आरोप कहीं गंभीर था: कुज़्मिन कहते थे कि वोरोनेझ में ज़ार द्वारा हिंसा के बाद एक युवती की मृत्यु हो गई। मामला लंबा खिंचा और पूछताछ में यातना दी गई। अंततः कुज़्मिन की जाँच के दौरान ही कारागार में मृत्यु हो गई।

लगभग उसी समय कुर्स्क के अव्तोमोन पुशेचनिकोव ने अपने संबंधी मिखाइल बुकरेयेव पर «अनुचित बातें» करने का आरोप लगाया। बुकरेयेव ने एक व्यापारी को बताया था कि प्लेग के समय कर्नल बाल्ताज़ार उनके यहाँ ठहरे थे। कहा गया कि कर्नल ने स्वीकार किया था कि ज़ार ने उनकी पत्नी को बहकाया, बदले में उन्हें दो पीपे मक्खन और दो पीपे शहद दिए तथा बाद में कर्नल बना दिया।

पूछताछ में बुकरेयेव अधिक सावधानी से बोले। उन्होंने माना कि जर्मन महिलाओं से पीटर के संबंधों का उल्लेख किया था, लेकिन ज़ार पर व्यभिचार का आरोप लगाने की इच्छा से इनकार किया। उन्होंने सचमुच बाल्ताज़ार के यहाँ मक्खन और शहद देखा था, लेकिन बाल्ताज़ार ने इसे सेवा का पुरस्कार बताया था। अदालत ने बुकरेयेव को कोड़ों, दागे जाने और साइबेरिया में निर्वासन की सज़ा दी। सज़ा लागू होने से पहले ही उनकी मृत्यु हो गई।

एक और घटना भी है। दिमित्री इसायेव नामक व्यक्ति ने स्वीकार किया कि उन्होंने एक मित्र के साथ ज़ार के निजी जीवन पर बातचीत की थी। उनका कथन था कि «परमप्रतापी राजकुमार [मेंशिकोव] को और किसलिए कृपा मिली है, यदि इसलिए नहीं कि महान सम्राट उसकी पत्नी और बहनों के साथ व्यभिचार करते हैं» और कि «वह रेजिमेंट में था, और सम्राट का एक स्वीडिश कुत्ता मर गया; सम्राट और परमप्रतापी राजकुमार अपनी पत्नी के साथ उस कुत्ते को देखने गए। उस समय परमप्रतापी राजकुमार की पत्नी सम्राट और राजकुमार के साथ केवल एक क़मीज़ में चल रही थी»। इस जाँच का अंत क्या हुआ, यह ज्ञात नहीं है।

इवान निकितिच निकितिन, «राजकुमारी मारिया कान्तेमिर का चित्र»

पीटर के जीवन का समलैंगिक पक्ष

निजी जीवन के स्रोतों से लगता है कि पीटर प्रथम के संबंध केवल महिलाओं से ही नहीं, पुरुषों से भी हो सकते थे।

विश्वसनीयता की सीमा स्पष्ट कर देना ज़रूरी है। इसका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है: न पीटर की अपनी स्वीकारोक्ति बची है, न कोई ऐसा दस्तावेज़ जिसमें उन्होंने इस पर खुलकर बात की हो।

लेकिन अनेक परोक्ष गवाहियाँ मौजूद हैं: अफ़वाहें, सुनी-सुनाई बातें, विदेशियों की टिप्पणियाँ, संस्मरण, डायरियाँ और आपराधिक मामले। ये बिखरी हुई सामग्री है और अक्सर तीसरे व्यक्तियों के माध्यम से मिली है। ख़ासकर विदेशी स्रोतों में रूसी दरबारी जीवन का वर्णन अक्सर बाहर से, अटकलों और राजनीतिक रंग वाली राय के साथ किया गया था।

महिलाओं से पीटर के संबंध स्रोतों में विस्तार से दर्ज हैं: उनकी पत्नियाँ, प्रेमिकाएँ, प्रेम-संबंध और पत्र ज्ञात हैं। इसलिए अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि यदि पीटर स्पष्ट रूप से महिलाओं में रुचि रखते थे, तो पुरुषों से उनके संबंध नहीं हो सकते थे। लेकिन अठारहवीं सदी के आरंभ के संदर्भ में यह तर्क बहुत सीधा और सरलीकृत है।

उस समय यौनिकता की समझ आज से अलग थी। «समलैंगिक» और «विषमलैंगिक» को स्थायी पहचान के रूप में अलग करने की आज की परिचित व्यवस्था तब मौजूद नहीं थी। लोग अलग-अलग तरह के संबंध बना सकते थे। अनेक उदाहरण ज्ञात हैं जिनमें पुरुषों के परिवार और बच्चे थे, लेकिन वे समलिंगी संबंध भी रखते थे। यह व्यक्तिगत आदतों, परिस्थितियों, आसपास के सामाजिक मानकों और बात सार्वजनिक होने के भय की तीव्रता पर निर्भर करता था।

पीटर प्रथम का पार्श्वचित्र, उत्कीर्णन

अठारहवीं सदी के आरंभ में समलैंगिकता के प्रति रूसी समाज का रवैया

पीटर के निजी जीवन की अफ़वाहों को परखते समय केवल कथनों पर ही नहीं, उस युग की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर भी ध्यान देना चाहिए: क्या स्वीकार्य था, क्या पाप था, क्या अशोभनीय था और किसे राज्य के लिए ख़तरा माना जाता था।

पीटर से पहले के रूस में «सदोम का पाप» कोई अनसुनी बात नहीं थी। विदेशी यात्रियों ने इसका वर्णन किया और ऑर्थोडॉक्स पादरियों ने भी अपने अनुयायियों को इससे सचेत किया। शुरुआती रोमानोव शासकों के समय भी यह व्यवहार समाप्त नहीं हुआ, और पीटर की युवावस्था इसी दौर के अंत में पड़ी।

हम इस विषय पर पहले भी लिख चुके हैं:

प्राचीन और मध्यकालीन रूस में समलैंगिकता

इसलिए यदि पीटर वास्तव में समलिंगी संबंध रखते थे तो इससे शायद कोई सामाजिक विस्फोट नहीं होता। अधिक संभावना यही है कि इसे अशोभनीय व्यवहार, पाप और मर्यादा का उल्लंघन माना जाता, ख़ासकर किसी सम्राट के लिए। यह ऐसे विषयों में से होता जिन्हें बाहर न लाने का प्रयास किया जाता था, न कि ऐसी चीज़ जिसे उस युग की धारणाओं के अनुसार समाज को ध्वस्त करने वाला माना जाता।

पीटर से जुड़े स्रोतों का संदर्भ: संस्मरण, अफ़वाहें और ऐतिहासिक किस्से

पीटर के सुधारों ने समाज को बुरी तरह बाँट दिया। कुछ लोग उन्हें नायक और नए रूस का निर्माता मानते थे, दूसरे परिचित जीवन-व्यवस्था को नष्ट करने वाला और «पुराने धर्म» का शत्रु। बदलाव के विरोधी अफ़वाहें फैलाते थे, जो कभी-कभी साफ़ तौर पर बेतुकी होती थीं। इनमें ज़ार के समलिंगी संबंधों की कहानियाँ भी थीं।

अफ़वाहों के साथ «किस्से» भी थे। अठारहवीं सदी में इस शब्द का अर्थ अक्सर आज के अर्थ में चुटकुला नहीं, किसी घटना का छोटा विवरण होता था। ऐसा पाठ संस्मरण और साहित्यिक दृश्य के बीच की चीज़ था: उसके आधार में कोई वास्तविक घटना हो सकती थी, लेकिन लगभग हमेशा वह दोबारा सुनाए जाने, सजाए जाने और कल्पना जोड़े जाने से गुज़र चुकी होती थी।

इसलिए यह समझना महत्त्वपूर्ण है कि ये कहानियाँ किन लेखकों पर आधारित हैं और उनकी गवाही की विश्वसनीयता को सामान्यतः कैसे परखा जाता है।

आंद्रेई नार्तोव। उन्हें «पीटर का खरादी» कहा जाता है। «पीटर महान के बारे में कहानियाँ और किस्से» नामक संग्रह का लेखक उन्हें माना जाता है। लेकिन एक मत यह भी है कि यह पाठ नार्तोव ने नहीं, उनके बेटे ने पीटर की मृत्यु के 61 वर्ष बाद लिखा था। पी. ए. क्रोतोव समेत कुछ इतिहासकार इन रचनाओं को साहित्यिक कल्पना मानते हैं।

याकोब श्टेलिन। यह जर्मन इतिहासकार 1735 में रूस आया था, जब पीटर की मृत्यु हो चुकी थी। 1785 में उसने जर्मन में «पीटर महान के बारे में सच्चे किस्से» प्रकाशित किया। श्टेलिन ने चालीस वर्ष से अधिक समय तक ज़ार के बारे में कथाएँ जमा कीं और फिर उन्हें नए रूप में लिखा।

काज़िमिझ वालिशेव्स्की। यह पोलिश इतिहासकार पीटर पर बहुत कुछ लिख चुका था। उसके काम की अक्सर आलोचना होती है: विशेषज्ञ उसे विश्वसनीय आधार नहीं मानते, क्योंकि उसमें मनमाने निष्कर्ष और संदिग्ध विवरण मिलते हैं।

निकीता विल्बोआ (फ़्रांसिस्क गियोम द विल्बुआ)। रूसी सेवा में आया यह फ़्रांसीसी व्यक्ति रोमांच की तलाश में था। «पीटर महान के समकालीन विल्बोआ की टिप्पणियाँ» का लेखक उसे माना जाता है। लेकिन शोधकर्ता इसे जाली पाठ मानते हैं। पेरिस में बची एक पांडुलिपि पर टिप्पणी है: «रूस के बारे में किस्से, विल्बुआ इसके लेखक नहीं हैं।»

फ़्रीडरिख बेरखोल्त्स। यह जर्मन कुलीन पीटर के समय रूस में रहा था। उसने विस्तृत डायरी रखी और घटनाएँ नियमित रूप से दर्ज कीं। उसकी टिप्पणियों को सामान्यतः विश्वसनीय माना जाता है; यह उस युग के प्रमुख स्रोतों में से एक है।

बोरिस कुराकिन। पीटर के सहयोगी और विदेश में रूस के पहले स्थायी राजदूत। उन्होंने «ज़ार पीटर अलेक्सेयेविच का इतिहास» लिखा। यह सत्ता के निकट रहकर व्यवस्था को भीतर से जानने वाले व्यक्ति की गवाही है। इसे सामान्यतः बाद में तैयार किए गए अफ़वाहों के संग्रहों से अधिक विश्वसनीय माना जाता है।

यहाँ सत्य और कल्पना की सीमा स्पष्ट नहीं है। इसलिए एक सरल रूपरेखा याद रखना उपयोगी है: नार्तोव के नाम से जुड़े पाठ शायद बाद की साहित्यिक रचना हैं; श्टेलिन ने अफ़वाहें इकट्ठा कर उनका पुनर्लेखन किया; वालिशेव्स्की ठोस आधार के रूप में भरोसेमंद नहीं हैं; विल्बोआ का पाठ संभवतः पूरी तरह जाली है; बेरखोल्त्स और कुराकिन पर आम तौर पर अधिक भरोसा किया जाता है।

पीटर प्रथम और सार्जेंट मोइसेई बुझेनिनोव

युवावस्था में, विवाहित होने के बावजूद, पीटर महल के बजाय दरबारी परिवेश से बाहर साधारण पृष्ठभूमि के लोगों के बीच अधिक रहने लगे। उनके आसपास बोयार या अभिजात परिवारों के बजाय दूसरे वर्गों के युवक थे। इनमें नोवोदेविची मठ के एक सेवक के बेटे मोइसेई बुझेनिनोव विशेष रूप से उभरे। मठ में रोज़मर्रा के काम-काज और घरेलू दायित्व निभाने वाले व्यक्ति को ऐसा सेवक कहा जाता था।

राजकुमार बोरिस कुराकिन इस काल का वर्णन इस प्रकार करते हैं:

«साधारण जनता के अनेक युवक महामहिम के कृपापात्र बने, विशेषकर बुझेनिनोव और कई दूसरे, जो दिन-रात उनके आसपास रहते थे। […] उक्त बुझेनिनोव के लिए प्रेओब्राझेन्स्की रेजिमेंट के कार्यालय के पास एक घर बनाया गया, जहाँ महामहिम रात बिताने लगे; और इसी से ज़ारिना [पत्नी] येवदोकिया से उनकी पहली दूरी शुरू हुई। वे केवल दिन में महल में माँ के पास आते, और कभी महल में भोजन करते, कभी बुझेनिनोव के उस घर में।»

— राजकुमार बोरिस कुराकिन, पीटर प्रथम के बारे में

इससे यह संभावना उभरती है कि येवदोकिया से विवाह में पहली गंभीर दरार अन्ना मॉन्स की कहानी से पहले पड़ चुकी थी। शायद पहली जुदाई का संबंध मोइसेई बुझेनिनोव से ही था, जिनके घर युवा ज़ार रात बिताना पसंद करते थे और बोझिल हो चुके विवाह से बचते थे। इस संदर्भ में बाद में मेंशिकोव का एक अत्यंत निकट व्यक्ति के रूप में उभरना भी अधिक समझ में आता है।

पीटर प्रथम और पावेल यागुझिन्स्की

मेंशिकोव से निकटता बढ़ने के बाद पीटर के एक और कृपापात्र बने — लिथुआनिया से आए पावेल यागुझिन्स्की, जिनके पिता ऑर्गन वादकों के शिक्षक थे।

ज़ार के आसपास उनका पहुँचना दरबारी संघर्ष का हिस्सा हो सकता था। माना जाता है कि चांसलर फ़्योदोर गोलोविन ने मेंशिकोव का प्रभाव कम करने के लिए यागुझिन्स्की की सिफ़ारिश की थी। चांसलर विदेश नीति और प्रशासन के मुख्य संचालकों में से एक थे; ऐसे स्तर का व्यक्ति वास्तव में अपने पसंद के लोगों को ज़ार के निकट पहुँचा सकता था।

यागुझिन्स्की के करियर की शुरुआत बहुत साधारण थी। मॉस्को में वे जूते साफ़ करते और दूसरे छोटे काम करके कमाते थे। समकालीन विदेशी फ़्रीडरिख क्रिश्चियन वेबर ने इन कामों के बारे में लिखा कि «शालीनता की भावना उन्हें उनका विस्तार से वर्णन करने की अनुमति नहीं देती»। यानी वे ऐसे काम का संकेत दे रहे थे जिसे वे लिखने के लिए अशोभनीय या अपमानजनक मानते थे। इसके बाद तेज़ उन्नति हुई: यागुझिन्स्की पीटर के प्रिय बने और कुछ वर्षों में सीनेट के प्रोक्यूरेटर-जनरल के पद पर पहुँच गए।

ऐसी तेज़ तरक़्क़ी लगभग हमेशा अफ़वाहें पैदा करती है। विरोधी कहते थे कि यागुझिन्स्की की सफलता का कारण केवल उनकी योग्यता और ज़ार के प्रति वफ़ादारी नहीं, बल्कि पीटर से अत्यधिक निकट संबंध भी थे।

पीटर प्रथम की समलिंगी कामुकता से जुड़ी विचित्रताएँ

स्रोतों में कुछ ऐसी घटनाएँ बची हैं जिन्हें लेख का लेखक पीटर प्रथम की समलिंगी कामुकता से जुड़ी विचित्रताएँ मानता है।

विल्बोआ ने लिखा था कि पीटर «यदि ऐसा कहा जा सकता है, प्रेमोन्माद के दौरों के अधीन थे, जिनमें वे स्त्री-पुरुष का भेद नहीं करते थे»।

नार्तोव का दावा था कि पीटर अकेले सो नहीं सकते थे। पत्नी पास न हो तो वे जो भी अर्दली मिलता उसे बिस्तर पर बुला लेते। अर्दली किसी अधिकारी या ज़ार का सैनिक सेवक होता था। नार्तोव के अनुसार पीटर रात के दौरों से पीड़ित थे और अक्सर अर्दली प्रोकोफ़ी मुर्ज़िन को गले लगाकर, उनके कंधों को हाथों से थामे सोते थे।

«सम्राट को वास्तव में कभी-कभी रात में शरीर में ऐसे दौरे पड़ते थे कि वे अर्दली मुर्ज़िन को अपने साथ लिटाते और उसके कंधे पकड़कर सो जाते थे; मैंने स्वयं भी यह देखा है।»

— आंद्रेई नार्तोव

बाद में मुर्ज़िन की तरक़्क़ी हुई और वे कर्नल बने।

श्टेलिन एक और घटना बताते हैं। उनके अनुसार शहर से बाहर विश्राम करते समय पीटर अर्दली को ज़मीन पर लेटने का आदेश देते और उसके पेट पर अपना सिर रख देते। सेवक को भूखा होना चाहिए था: यदि उसका पेट गुड़गुड़ाता तो पीटर चिढ़ जाते और मार भी सकते थे।

कुछ और कहानियाँ भी हैं: लिखा गया है कि पीटर अपने कृपापात्रों से खुलकर स्नेह जताते थे — उन्हें गले लगाते, सिर सहलाते और चूमते थे। इन विवरणों के अनुसार अर्दली अफ़ानासी तातिश्चेव को एक दिन में उनसे «सौ चुंबन» तक मिल सकते थे।

बेरखोल्त्स ने डायरी में लिखा कि सम्राट का एक नया कृपापात्र बना है — युवा वासिली पोस्पेलोव। पोस्पेलोव शाही गायन-दल में गाते थे और उनकी आवाज़ पीटर को पसंद आई। पीटर स्वयं भी गाना पसंद करते थे और गायकों के साथ खड़े होकर गा सकते थे। बेरखोल्त्स के अनुसार पोस्पेलोव उन्हें इतने प्रिय हो गए कि ज़ार लगभग कभी उनसे अलग नहीं होते, उन्हें दुलारते रहते और ऊँचे अधिकारियों को तब तक इंतज़ार करवाते जब तक प्रिय व्यक्ति से उनकी बातचीत पूरी न हो जाए।

«अचरज है कि बड़े लोगों को किस-किस प्रकार के व्यक्तियों से लगाव हो सकता है। यह व्यक्ति निम्न पृष्ठभूमि का है, दूसरे गायकों जैसा ही पला-बढ़ा, देखने में बहुत अनाकर्षक और, सभी बातों से प्रतीत होता है, साधारण, बल्कि मूर्ख भी है — इसके बावजूद राज्य के सबसे प्रतिष्ठित लोग उसे ख़ुश करने में लगे रहते हैं।»

— फ़्रीडरिख विल्हेल्म बेरखोल्त्स, वासिली पोस्पेलोव और पीटर प्रथम के बारे में

यान वेनिक्स, «रूसी ज़ार पीटर प्रथम का चित्र»

कृपापात्र और पक्षपोषण की व्यवस्था

पक्षपोषण ऐसी व्यवस्था है जिसमें राजा के निकटवर्ती व्यक्तियों को विशेष स्थान और विशेषाधिकार मिलते हैं। इसके लिए प्रयुक्त रूसी शब्द फ़ावोरितिज़्म फ़्रांसीसी से आया है और उसका मूल लैटिन favor, अर्थात «अनुग्रह», में है। इसी से फ़ावोरित और फ़ावोरित्का शब्द, यानी पुरुष और महिला कृपापात्र, निकले हैं। कभी-कभी प्रेम-साथी भी कृपापात्र बनते थे, लेकिन ऐसा होना ज़रूरी नहीं था: मुख्य बात यह है कि कृपापात्र वह व्यक्ति है जिस पर सम्राट विश्वास करता और जिसे दूसरों से अलग महत्त्व देता है।

पक्षपोषण केवल व्यक्तिगत स्नेह की अभिव्यक्ति नहीं, सत्ता का एक तंत्र था। कृपापात्रों को पद, पुरस्कार, धन, ज़मीन और फ़ैसले लेने की प्रक्रिया तक पहुँच मिलती थी। वे मित्र, सहयोगी, प्रशासक और कभी-कभी अंतरंग साथी भी हो सकते थे।

पीटर के दरबार में तीन व्यक्ति विशेष रूप से प्रमुख थे: रोमोडानोव्स्की, शेरेमेतेव और मेंशिकोव। पहले दो को असाधारण विशेषाधिकार था — वे किसी भी समय, रात में भी, ज़ार के पास जा सकते थे। पीटर उनके प्रति विशेष सम्मान दिखाते और स्वयं दरवाज़े तक छोड़ने जाते थे।

अठारहवीं सदी में रूस में पक्षपोषण अपने शिखर पर पहुँचा। पीटर के निकटतम सहयोगी अलेक्सांद्र दानिलोविच मेंशिकोव सबसे उल्लेखनीय कृपापात्रों में से एक बने।

अलेक्सांद्र दानिलोविच «मेरे हृदय» मेंशिकोव

स्रोतों में मेंशिकोव का पहला उल्लेख 1698 का है। ऑस्ट्रियाई राजनयिक योहान कोर्ब ने उन्हें «निम्न वर्ग से आया ज़ार का कृपापात्र अलेक्साश्का» कहा था। उनकी उत्पत्ति आज भी विवादित है: एक मत के अनुसार वे वास्तव में साधारण व्यक्ति थे; दूसरे के अनुसार कुलीन पोलिश मेंझिक परिवार से थे।

मेंशिकोव का जन्म 1673 में, पीटर प्रथम से एक वर्ष बाद हुआ। समकालीनों ने उन्हें लंबा, मज़बूत और स्पष्ट नैन-नक्श वाला व्यक्ति बताया। किंवदंती के अनुसार युवावस्था में वे पेस्ट्री बेचते थे, जब तक युवा ज़ार के निकटवर्ती व्यक्तियों में से एक, दरबार के «यूरोपीय» और पीटर के अनेक उपक्रमों के आयोजक फ़्रांत्स लेफ़ोर्ट की नज़र उन पर नहीं पड़ी।

1680 के दशक के अंत में मेंशिकोव दरबार पहुँचे और पीटर के अर्दली बने। ज़ार का अर्दली केवल नौकर नहीं था, बल्कि ऐसा व्यक्ति था जो लगातार साथ रहता: रोज़मर्रा के जीवन में मदद करता, यात्राओं में साथ जाता, रक्षा करता, व्यक्तिगत काम करता और भोजों में भाग लेता। विवरण से लगता है कि मेंशिकोव यह भूमिका अच्छी तरह निभाते थे।

«[मेंशिकोव] अपनी पूरी संपत्ति के लिए ज़ार की कृपा के ऋणी हैं, जो उनसे प्रेम करते हैं; वहीं रूसी अभिजात वर्ग उनसे ईर्ष्या और घृणा करता है, और उसके सामने रखने को उनके पास अपने सम्राट के संरक्षण के अलावा कुछ नहीं है।»

— समुद्री मामलों के फ़्रांसीसी वाणिज्यदूत ए. द लावी, अलेक्सांद्र मेंशिकोव के बारे में

उत्तरी युद्ध में मेंशिकोव ने नोतेबुर्ग पर आक्रमण और नियेनशांत्स की घेराबंदी में भाग लिया। ये नेवा नदी और उसके आसपास के महत्त्वपूर्ण दुर्ग थे, जिनके लिए बाल्टिक सागर तक पहुँच की लड़ाई स्वीडन से लड़ी जा रही थी।

सैन्य सेवाओं के बदले उन्हें सेंट पीटर्सबर्ग प्रांत का गवर्नर नियुक्त किया गया और वे नई राजधानी के आसपास के क्षेत्र का वास्तविक प्रशासन चलाने लगे। मेंशिकोव ने पीटर्सबर्ग, क्रोनश्टाड्ट, जहाज़-निर्माण स्थलों और कारख़ानों के निर्माण का नेतृत्व किया। उन्हें पीटर के बेटे की शिक्षा का दायित्व भी सौंपा गया।

«सामान्यतः वे [पीटर] केवल क़ानून के समर्थक होने का दिखावा करते हैं; जब कोई अन्याय होता है, तो राजकुमार [मेंशिकोव] को पीड़ितों की घृणा बस अपनी ओर मोड़नी होती है… और ज़ार के बारे में लोग कहते हैं कि वे स्वयं अच्छे हैं; अनेक मामलों का दोष राजकुमार पर डाल दिया जाता है, जिनमें वे अक्सर निर्दोष होते हैं…»

— डेनमार्क के राजदूत युस्त यूल, पीटर प्रथम और मेंशिकोव के बारे में

पोल्तावा के युद्ध के बाद मेंशिकोव का प्रभाव बहुत बढ़ गया। इस विवरण के अनुसार उनके ही क़दमों ने स्वीडिश राजा चार्ल्स द्वादश को रूसी छावनी पर अचानक हमला करने से रोका और यह विजय के प्रमुख कारणों में से एक था। पोल्तावा के बाद मेंशिकोव केवल ज़ार के निकट रहने वाले व्यक्ति नहीं रहे: वे सेना के मुख्य प्रशासनिक निकाय सैन्य कॉलेजियम के प्रमुख बने, सीनेट में शामिल हुए और कई सर्वोच्च पदों पर पहुँचे।

«मेंशिकोव अधर्म में गर्भस्थ हुए, सभी पापों में उनकी माँ ने उन्हें जन्म दिया, और छल-कपट में वे अपना जीवन समाप्त करेंगे।»

— पीटर प्रथम, अलेक्सांद्र मेंशिकोव के बारे में

मेंशिकोव को केवल साधन के रूप में सत्ता नहीं चाहिए थी। वे लोभ से उपाधियाँ, धन और पुरस्कार जमा करते थे। उन्हें रूस का सबसे बड़ा राजकोष-लुटेरा कहा जाता था — ऐसा व्यक्ति जिसने बड़े पैमाने पर सरकारी ख़ज़ाने से चोरी की।

वे जानबूझकर विलासितापूर्ण कपड़े पहनते थे: यूरोपीय सम्राटों की तरह उनके काफ़्तान हीरों से चमकते थे। सम्मान के प्रतीक माँगने में भी उन्हें संकोच नहीं था। उदाहरण के लिए, उन्होंने आइज़क न्यूटन से ब्रिटिश अकादमी के मानद सदस्य का दर्जा माँगा, हालाँकि समकालीनों के अनुसार वे मुश्किल से लिखना जानते थे।

1720 के दशक तक प्रभाव के मामले में वे केवल पीटर से पीछे थे। जहाँ ज़ार मौजूद नहीं होते, वहाँ अक्सर मेंशिकोव निर्णय लेते — या निर्णय उनके माध्यम से लिए जाते थे।

«सम्मान और मुनाफ़े से जुड़ी हर चीज़ में वे अब तक पैदा हुए प्राणियों में सबसे अधिक अतृप्त दिखाई देते हैं।»

— डेनमार्क के राजदूत युस्त यूल, अलेक्सांद्र मेंशिकोव के बारे में

मिखिएल वान मुस्खेर, «अलेक्सांद्र दानिलोविच मेंशिकोव का चित्र»

8 फ़रवरी 1725 को पीटर महान की मृत्यु हो गई; वे कोई वसीयत नहीं छोड़ गए। मेंशिकोव ने तेज़ी से काम किया और येकातेरीना प्रथम को सिंहासन पर बैठने में मदद की। लेकिन येकातेरीना अक्सर बीमार रहती थीं और अभिजात वर्ग में इस अस्थायी सत्ता-संचालक के प्रति असंतोष बढ़ रहा था, जिसने अपने हाथों में अत्यधिक शक्ति केंद्रित कर ली थी। विरोधी युवा पीटर द्वितीय के आसपास एकजुट हो गए और अनुकूल अवसर की प्रतीक्षा करने लगे।

1727 के वसंत में येकातेरीना की मृत्यु हुई। मेंशिकोव ने पीटर द्वितीय को सिंहासन दिलवाया, लेकिन एक शर्त रखी: नए सम्राट को उनकी बेटी से विवाह करना होगा। यही तय हुआ। मेंशिकोव ने युवा ज़ार को अपने महल में रखा और उनके लिए नया महल बनवाना शुरू किया। यह दिखावे का एक संकेत था: सम्राट मेरे घर रहते हैं, इसलिए प्रमुख मैं हूँ।

लेकिन पीटर द्वितीय को शिकार और प्रकृति के बीच घूमना बहुत पसंद था। वहाँ उनके आसपास के लोगों ने जल्दी ही लड़के को मेंशिकोव से दूर कर दिया। अंत में ज़ार ने पूर्व संरक्षक से मुँह मोड़ लिया और सगाई तोड़ दी।

«मेरे अपने बहुत से दुश्मन हैं। मुझे बर्बाद करने के लिए साम्राज्ञी येवदोकिया क्या कुछ नहीं करेंगी। मुझ पर किस-किस चीज़ का शक नहीं किया जाता! मैंने जिनका भाग्य बनाया, उन कृतघ्नों का मैं कितनी बार शिकार हुआ हूँ! मैं खाई से केवल एक क़दम दूर खड़ा हूँ… उनका [पीटर का] बेटा मुझे तुच्छ समझता है, स्त्रेल्त्सी मुझसे घृणा करते हैं। पैट्रियार्क अपने पतन का एकमात्र दोषी मुझे मानते हैं; पादरी मुझसे डरते और मुझे शाप देते हैं; बोयार मुझसे नफ़रत करते हैं। मैं कभी दोषी होता भी हूँ। यदि हम युद्ध हार जाएँ, यदि ज़ार के पास सैनिक या धन कम पड़ जाए, तो सब कहते हैं कि मैंने उन्हें सैनिकों को किसी और काम में लगाने की सलाह दी और धन अपने ऊपर ख़र्च कर लिया। वे पीटर्सबर्ग के निर्माण के लिए भी मुझे दोषी ठहराने का साहस करते हैं। मैं ईर्ष्यालुओं और शत्रुओं से घिरा हूँ, और यदि मैं निर्वासन से बच गया तो मुझे स्वयं आश्चर्य होगा।»

— अलेक्सांद्र दानिलोविच मेंशिकोव

इसके बाद सर्वोच्च गुप्त परिषद ने मेंशिकोव के पद, उपाधियाँ, धन और सत्ता छीन ली। उन्हें साइबेरिया निर्वासित कर दिया गया।

रास्ते में उनकी पत्नी दार्या की मृत्यु हो गई। क्रिसमस 1728 को, अपने अठारहवें जन्मदिन पर, उनकी बेटी मारिया भी मर गईं — वही बेटी जिन्हें साम्राज्ञी बनना था।

नवंबर 1729 में मेंशिकोव की भी मृत्यु हो गई। उन्हें स्थायी रूप से जमी हुई ज़मीन में दफ़नाया गया, लेकिन बाद में नदी का किनारा धँस गया और वसंत की बाढ़ उनके अवशेष बहा ले गई। आगे चलकर साम्राज्ञी अन्ना इओआन्नोव्ना ने उनके बच्चों को निर्वासन से वापस बुला लिया।

सेंट पीटर्सबर्ग का मेंशिकोव महल, जो अब हर्मिटाज की एक शाखा है

मेंशिकोव और पीटर प्रथम

मेंशिकोव में वे गुण थे जिन्हें पीटर सत्ता में आए «नए» व्यक्ति में विशेष महत्त्व देते थे। वे बुद्धिमान, तेज़, ऊर्जावान, साहसी, शारीरिक रूप से मज़बूत और अधीनस्थों के प्रति कठोर थे, लेकिन लोगों से निभाना भी जानते थे। वे पुरानी दुश्मनी नहीं पालते थे और «असीमित मात्रा में» शराब पी सकते थे। ऐसे लोग कम थे, और पीटर उनकी बहुत-सी बातें माफ़ कर देते थे।

पीटर को मेंशिकोव से वास्तव में सच्चा लगाव था। दोनों ने साथ युद्ध लड़े, निर्माण कार्य किए और सैन्य अभियानों की कठिन दिनचर्या झेली। मेंशिकोव लगातार उनके निकट रहते: युद्धक्षेत्र में, ज़ार की मेज़ पर और राजकाज के निर्णयों के समय।

1703 में इस निकटता को प्रतीकात्मक मान्यता मिली: एक ही दिन दोनों को रूस का सर्वोच्च सम्मान, ऑर्डर ऑफ़ सेंट एंड्रयू द फ़र्स्ट-कॉल्ड, प्रदान किया गया।

यही निकटता इस चर्चा का आधार बनी कि शायद उनका रिश्ता साधारण मित्रता और सेवा से आगे जाता था।

मेंशिकोव और पीटर प्रथम का पत्राचार

पीटर मेंशिकोव को बहुत आत्मीयता से संबोधित करते थे। वे उन्हें मित्रतापूर्ण उपनाम अलेक्साशा से पुकारते थे, हालाँकि ऐसे उपनाम दूसरों को भी दे सकते थे।

अधिक महत्त्वपूर्ण दूसरी बात है: मेंशिकोव को ही वे «मेरा हृदय» और «मेरे हृदय के भाई और साथी» लिखते थे। पत्रों में जर्मन संबोधन भी मिलते हैं: «mein Herzenskind!» («मेरे हृदय की संतान»), «mein bester Freund» («मेरे सबसे अच्छे मित्र»), «mein Bruder» («मेरे भाई»)।

मेंशिकोव भी सामान्य दरबारी दासभाव के बिना, खुलकर उत्तर देते थे। तुलना के लिए, फ़ील्ड मार्शल शेरेमेतेव विनम्रता से अपने हस्ताक्षर के साथ «आपका परम आज्ञाकारी दास» लिखते थे। इसके विपरीत अलेक्साश्का सरल, साथी जैसे अंदाज़ में लिखते: «मेरे श्रीमान कैप्टन, नमस्कार!» — और केवल अपना नाम लिखते। यहाँ «कैप्टन» खोखली औपचारिकता नहीं था: पीटर को «सैन्य भूमिकाएँ निभाना» पसंद था और वे ज़ार होने पर भी चाहते थे कि उन्हें सैन्य पद से संबोधित किया जाए।

मेंशिकोव को लिखे पीटर के कुछ पत्र इस प्रकार हैं:

«माइन हेर्त्स। [मेरा हृदय।]

तुम्हारे कहने पर हमने यहाँ, ईश्वर की कृपा से, ख़ूब आनंद मनाया, कोई स्थान नहीं छोड़ा। कीव के धर्माध्यक्ष के आशीर्वाद से हमने नगर, उसके परकोटों और द्वारों के नाम रखे; इस पत्र के साथ उसका नक़्शा भेज रहा हूँ। आशीर्वाद के समय पहले [द्वार पर] मदिरा, दूसरे पर सैक, तीसरे पर राइन की मदिरा, चौथे पर बियर, पाँचवें पर मधु-मदिरा और मुख्य द्वार पर राइन की मदिरा पी; यह पत्र लाने वाला और विस्तार से बताएगा। सब अच्छा है; बस हे ईश्वर, दे, दे, दे कि तुम्हें ख़ुशी से देख सकूँ। तुम स्वयं जानते हो।

अंतिम, वोरोनेझ द्वार, हमने बड़ी ख़ुशी के साथ पूरा किया, आनेवाली बातों को याद करते हुए।»

— पीटर प्रथम, अलेक्सांद्र मेंशिकोव को पत्र, 3 फ़रवरी 1703

«माइन लीब्स्ते कामेराद। [मेरे प्रियतम साथी।]

बहुत आग्रह करता हूँ कि पंद्रह से बीस सबसे अच्छे तोपची इस दूत के साथ भेजे जाएँ; दोहराकर यही निवेदन है। यहाँ अपने हाल के बारे में तुम्हें नहीं लिखना चाहता: ईश्वर करे तुम्हें ख़ुशी से देख सकूँ।»

— पीटर प्रथम, अलेक्सांद्र मेंशिकोव को पत्र, 7 जुलाई 1704

«मैं बहुत पहले तुम्हारे पास आ गया होता, लेकिन अपने पापों और दुर्भाग्य के कारण यहाँ इस तरह रह गया: जिस दिन यहाँ से निकलना था, उसी दिन बुख़ार आ गया।

[…] बीमारी से जितना, उससे अधिक इस दुख से कि समय व्यर्थ जा रहा है, और तुमसे अलग रहने से भी। इसके साथ तुम्हें ईश्वर की सुरक्षा में सौंपता हूँ और बना रहता हूँ।

दे, दे, दे, प्रभु ईश्वर, कि तुम्हें ख़ुशी से देख सकूँ। कृपया हमारे मित्रों और परिचितों को मेरी ओर से नमस्कार कहना।»

— पीटर प्रथम, अलेक्सांद्र मेंशिकोव को पत्र, 8 मई 1705

«इससे पहले मैंने तुम्हें अपनी पीड़ा के बारे में लिखा था और कहा था कि फिर लिखूँगा; अब उसके बारे में सूचित करता हूँ कि ईश्वर की कृपा से उसमें कमी आ रही है और संकेत भी अच्छे दिखते हैं; लेकिन कब पूरी तरह जाएगी, यह ईश्वर ही जानता है। इस बीमारी में तुमसे अलग रहने का दुख भी कम नहीं, जिसे कई बार मन में सह चुका हूँ; लेकिन अब और नहीं सह सकता: कृपया मेरे पास जल्दी आओ, ताकि मेरा मन प्रसन्न हो, जिसका कारण तुम स्वयं समझ सकते हो; अंग्रेज़ डॉक्टर को भी ले लो और थोड़े लोगों के साथ यहाँ आ जाओ।»

— पीटर प्रथम, अलेक्सांद्र मेंशिकोव को पत्र, 14 मई 1705

पुरुषों से ज़ार के प्रेम-संबंधों की चर्चा करने की सज़ा

ग़ैर-कुलीन पृष्ठभूमि से तेज़ी से सत्ता के शिखर तक पहुँचे मेंशिकोव का अफ़वाहों का पात्र बनना लगभग अनिवार्य था। वे ज़ार के जितने निकट हुए, लोग उनकी सफलता का कारण सेवा और योग्यता के बजाय सम्राट से व्यक्तिगत निकटता को उतना अधिक बताने लगे।

ऐसी बातें आम लोगों के बीच भी होती थीं। अदालती मामलों से इसका पता चलता है: रूसी प्राचीन अभिलेखों के राज्य अभिलेखागार (РГАДА) में ऐसे दस्तावेज़ बचे हैं जिनमें अभियुक्तों ने सम्राट को «प्रकृति-विरुद्ध» प्रवृत्तियों वाला बताया था।

1. «व्यापारी गाव्रीला रोमानोव का मामला» (РГАДА. फ़ंड 6. सूची 1. फ़ाइल 10)।

1698 में व्यापारी गाव्रीला रोमानोव पर ज़ार की «निंदा», अर्थात सम्राट के बारे में अपमानजनक बातें कहने का आरोप लगा। फ़ादेयका ज़ोलोतार्योव गवाह बने। उन्होंने कहा कि पनीर-सप्ताह, अर्थात मास्लेनित्सा के त्योहार पर, जब रोमानोव उनके मेहमान थे, उन्होंने कहा:

— सम्राट की जैसी कृपा अलेक्साश्का मेंशिकोव पर है, वैसी किसी पर नहीं।

ज़ोलोतार्योव ने इस कृपा की «अच्छी» व्याख्या करने की कोशिश की — इसे ईश्वर की सहायता और मेंशिकोव की प्रार्थनाओं का फल बताया। लेकिन उनके अनुसार रोमानोव ने अलग और कहीं अधिक ख़तरनाक उत्तर दिया:

— इसमें ईश्वर का कोई हाथ नहीं, शैतान ने उसे [पीटर को] इसके साथ मिला दिया; वह उसके साथ व्यभिचार करता है और उसे अपने बिस्तर पर पत्नी की तरह रखता है।

पूछताछ में रोमानोव ने सब कुछ नकार दिया। उनका कहना था कि ज़ोलोतार्योव ने एक पुराने क़र्ज़ के कारण उन पर झूठा आरोप लगाया: कथित तौर पर लेनदार समझाने और धमकाने, दोनों तरीक़ों से पैसे वापस लेना चाहता था।

स्वयं को बचाने के लिए रोमानोव ने मेंशिकोव को ही रिश्वत देने का निश्चय किया और अपने पोते तथा एक सेवक को पैसे भरे छोटे पीपे के साथ भेजा। लेकिन मेंशिकोव के घर स्वयं ज़ार ने उन्हें पकड़ लिया। दूतों को गिरफ़्तार कर लिया गया।

नई पूछताछ में रोमानोव ने कहा कि वे गंभीर रूप से बीमार हैं, पाप-स्वीकार कर चुके हैं और जेल के बजाय घर में मरना चाहते हैं। जल्दी ही वास्तव में उनकी मृत्यु हो गई और जाँच बंद कर दी गई।

इस परिणाम के बावजूद यह घटना महत्त्वपूर्ण है। इससे पता चलता है कि पीटर और मेंशिकोव की असामान्य निकटता की बातें पहले से प्रचलित थीं और इतनी गंभीर मानी जाती थीं कि राजनीतिक जाँच का विषय बन सकती थीं।

2. «वोलोग्दा की जेल में बंद लोगों के आरोपों [बदनामी] पर मामला» (РГАДА. फ़ंड 371. सूची 2, भाग 4. प्रविष्टि 734)।

1703 में वोलोग्दा के दो बंदियों ने निर्वासित सैनिक इवान रोकोतोव पर ज़ार के बारे में ख़तरनाक बातें कहने, अर्थात राजनीतिक अपराध, का आरोप लगाया। मुख़बिरी का सार यह था: कुछ वर्ष पहले जेल में रोकोतोव ने कथित रूप से दूसरे निर्वासित निकीता सेलिवेर्स्तोव की बातें दोहराई थीं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार सेलिवेर्स्तोव कैप्टन मिखाइला फ़ेओक्तिस्तोव की सेवा में थे।

उनके अनुसार रोकोतोव ने बताया था कि सेलिवेर्स्तोव ज़ार के बारे में कहते थे:

— वह कैसा ज़ार है, वह ज़ार नहीं, ढोंगी है; अलेक्साश्का मेंशिकोव के साथ व्यभिचार करता है, इसलिए उस पर कृपा करता है।

आरोप सुनकर सेलिवेर्स्तोव ने उसे नकार दिया। उन्होंने उलटे कहा कि इन शब्दों का मूल स्रोत स्वयं शिकायतकर्ता है। कथित तौर पर आज़ोव अभियान के दौरान उसने सब कुछ अपनी आँखों से देखा था:

— …वह सम्राट के तंबू के बाहर पहरे पर था; और सम्राट केवल क़मीज़ पहने घूमते हुए उसे, अलेक्सांद्र [मेंशिकोव] को, चूमते हैं, और चूमने के बाद उसके साथ आराम करने [सोने] लेट जाते हैं।

आगे मामले में यातना दी गई। जाँचकर्ताओं ने सेलिवेर्स्तोव को दो बार यातना दी, लेकिन वे अपने कथन पर अडिग रहे: आरोप जेल के पुराने झगड़ों का बदला था। उपलब्ध सामग्री से मामले का अंतिम परिणाम स्पष्ट नहीं है।

अलेक्सेई वेनेत्सियानोव, «पीटर महान: सेंट पीटर्सबर्ग की स्थापना» [मेंशिकोव के साथ]

पीटर प्रथम के समय सेना में «सोडोमी» की सज़ा का आरंभ

पहली नज़र में यह विरोधाभास लगता है: पीटर के समय पुरुषों से उनकी निकटता की अफ़वाहें चलती हैं, और उन्हीं के शासन में «सोडोमी» के लिए पहली राजकीय सजाएँ आती हैं। लेकिन इसके पीछे व्यावहारिक तर्क था।

पीटर यूरोपीय नमूने पर सेना बना रहे थे और यूरोप में देखे नियम रूस ला रहे थे। कई यूरोपीय देशों में समलिंगी संबंधों के विरुद्ध क़ानून पहले से मौजूद थे। उसी तर्क से ऐसे नियम रूस में भी आने थे। शुरुआत में वे केवल सैनिकों पर लागू हुए, क्योंकि पीटर के सुधारों का मुख्य क्षेत्र सेना थी।

इस आदेश के क्रियान्वयन का दायित्व मेंशिकोव को दिया गया। 1706 में उन्होंने «संक्षिप्त अनुच्छेद» जारी किए — सैन्य नियमों और दंडों का छोटा संकलन। इसमें पहली बार «अप्राकृतिक व्यभिचार» के लिए दंड तय हुआ। पुरुषों के बीच यौन-संबंध या बच्चों को यौन रूप से भ्रष्ट करने पर ज़िंदा जलाने की सज़ा थी, लेकिन वास्तव में किसी को यह मृत्युदंड नहीं दिया गया। लगभग दस वर्ष बाद सज़ा हल्की कर दी गई: 1716 की सैन्य संहिता में मृत्युदंड की जगह शारीरिक दंड रखे गए।

इस पर अलग लेख में विस्तार से पढ़ें:

अठारहवीं सदी के रूसी साम्राज्य में समलैंगिकता: यूरोप से लिए गए समलैंगिकता-विरोधी क़ानून और उनका इस्तेमाल

पीटर की मृत्यु का कारण: सिफ़िलिस या कुछ और?

जीवन के अंतिम वर्षों में पीटर की सेहत पर बहुत चर्चा होती थी। 1721 में पोलिश राजदूत योहान लेफ़ोर्ट ने लिखा:

«ज़ार की सेहत दिन-ब-दिन ख़राब हो रही है; साँस फूलना उन्हें बहुत परेशान करता है। माना जाता है कि उनके भीतर एक फोड़ा है जो समय-समय पर खुल जाता है; और मैंने सुना है कि पिछली बार गले की तकलीफ़ उस फोड़े से निकले मवाद के कारण थी; इसके अलावा वे अपनी बिल्कुल देखभाल नहीं करते।»

— पोलिश राजदूत योहान लेफ़ोर्ट, पीटर प्रथम की सेहत के बारे में, 1721

दरबारियों ने एक संयोग भी देखा, जिससे और अफ़वाहें बनीं: शाही परिचारकों में एक युवक ज़ार के साथ ही बीमार पड़ा। हालाँकि उसे विशेष सुंदर नहीं माना जाता था, फिर भी इससे संभावित संबंध के क़यास लगने लगे।

सिफ़िलिस की धारणा अठारहवीं सदी में ही सामने आ गई थी। लेकिन उस समय चिकित्सक सिफ़िलिस और गोनोरिया में अच्छी तरह अंतर नहीं कर पाते थे: दोनों रोगों के लिए वही शब्द और मिलते-जुलते लक्षण इस्तेमाल हो सकते थे। ज़ार के शव-परीक्षण की औपचारिक रिपोर्ट सुरक्षित नहीं है।

1970 में केंद्रीय त्वचा एवं यौनरोग संस्थान के विशेषज्ञों ने उपलब्ध सामग्री का अध्ययन करके निष्कर्ष निकाला कि मृत्यु का कारण यूरोसेप्सिस था। यह मूत्रमार्ग की बीमारी से जुड़ा गंभीर संक्रमण है: मार्ग अवरुद्ध होता है, सूजन बढ़ती है और गुर्दों की तीव्र विफलता विकसित होती है। विवरणों से लगता है कि पीटर तेज़ दर्द और पेशाब करने में गंभीर कठिनाई से पीड़ित थे; रोग तेज़ी से बढ़ा और जानलेवा साबित हुआ।

पीटर यौनसंचारित रोगों के ख़तरे को अच्छी तरह समझते थे। उनके शासन में बने अस्पतालों में संक्रमित सैनिकों के लिए विशेष वार्ड खोले गए। उनके कार्यकाल में रूस में 10 बड़े अस्पताल और 500 से अधिक मैदानी चिकित्सालय खोले गए।

इवान निकितिच निकितिन, «मृत्युशय्या पर पीटर प्रथम»

निष्कर्ष

पीटर प्रथम के व्यक्तित्व में अक्सर उनके निजी जीवन के बारे में नई धारणाएँ जोड़ने का प्रयास किया जाता है। लेकिन अटकलों पर निश्चित निष्कर्ष नहीं बनाए जा सकते। ऐतिहासिक शोध सावधानी और तथ्यों की जाँच माँगता है: चौंकाने वाली परिकल्पनाएँ अपने आप में महत्त्वपूर्ण नहीं, बल्कि स्रोतों को विवेकपूर्ण ढंग से परखने और केवल पुष्ट जानकारी पर भरोसा करने की क्षमता महत्त्वपूर्ण है।

इतिहास के अध्ययन की ताक़त यह है कि वह हमें संदेह करना और अनुमान को सत्य बनाकर पेश न करना सिखाता है।

संभवतः पीटर प्रथम के निजी जीवन का पूरा सच अज्ञात ही रहेगा। उनके बारे में बहुत-सी अफ़वाहें और संकेत हैं, लेकिन उनकी संभावित उभयलैंगिकता का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं है। जिन परोक्ष संकेतों का कभी-कभी उल्लेख होता है वे बिखरे हुए हैं और उनकी अलग-अलग व्याख्याएँ संभव हैं, इसलिए उनका एक ही निश्चित अर्थ नहीं निकाला जा सकता।

ऐसे संकेतों को पूरी तरह अनदेखा करके यह कहना भी अजीब होगा कि यहाँ चर्चा करने लायक कुछ नहीं है। इससे दूसरी अतिवादी स्थिति बनती है: या तो पर्याप्त आधार के बिना हर धारणा मान ली जाए, या सब कुछ पूरी तरह नकार दिया जाए। दोनों नज़रिए भरोसेमंद नहीं हैं।

निष्कर्ष इस तरह रखा जा सकता है: पीटर प्रथम उभयलैंगिक हो सकते थे और नहीं भी। उपलब्ध जानकारी के आधार पर सबसे सटीक बात यही होगी कि यह संभावना मौजूद है, लेकिन सिद्ध नहीं है। इसलिए इसे स्थापित तथ्य घोषित नहीं करना चाहिए, लेकिन जब प्रश्न सावधानी से और स्रोतों के आधार पर उठाया जा रहा हो, तो उसे पूछने पर रोक भी नहीं लगानी चाहिए।

अंत में पीटर के बारे में तीन राय प्रस्तुत हैं: नकारात्मक, तटस्थ और प्रशंसात्मक।

«उन्मादी, शराबी, सिफ़िलिस से सड़ता हुआ यह पशु चौथाई सदी तक लोगों को नष्ट करता है, मारता है, जलाता है, जीवित ज़मीन में गाड़ता है, पत्नी को क़ैद करता है, व्यभिचार करता है, पुरुषों से यौन-संबंध बनाता है, शराब पीता है, मनोरंजन के लिए स्वयं सिर काटता है, धर्म का अपमान करता है, जननांगों के आकार की पाइप-नलियों से बने क्रूस जैसे चिह्न और सुसमाचार की नक़ल — वोदका का बक्सा — लेकर मसीह का गुणगान करने जाता है, अर्थात आस्था का उपहास करता है, अपनी वेश्या और अपने प्रेमी का राज्याभिषेक करता है, रूस को तबाह करता है, बेटे को मरवा देता है और सिफ़िलिस से मरता है; और न केवल उसके कुकर्मों को याद नहीं किया जाता, बल्कि आज तक इस दानव के पराक्रम की प्रशंसा बंद नहीं हुई और उसके हर तरह के स्मारकों का कोई अंत नहीं है।»

— लेव निकोलायेविच तोलस्तोय, पीटर प्रथम के बारे में

«वह बर्बर जिसने अपने रूस को सभ्य बनाया; जिसने नगर बनाए लेकिन स्वयं उनमें रहना नहीं चाहा; जिसने पत्नी को कोड़ों से दंडित किया और स्त्री को व्यापक स्वतंत्रता दी — सार्वजनिक दृष्टि से उसका जीवन महान, समृद्ध और उपयोगी था, निजी दृष्टि से जैसा बन पड़ा, वैसा था।»

— ऑगस्ट स्ट्रिंडबर्ग, पीटर प्रथम के बारे में

«इस महान सम्राट की तुलना किससे करूँ? प्राचीन और आधुनिक काल में मुझे ऐसे शासक दिखाई देते हैं जिन्हें महान कहा गया है। और सचमुच वे दूसरों से महान हैं। लेकिन पीटर के सामने छोटे हैं। …तो हमारे नायक की तुलना किससे करूँ? मैंने अक्सर उस सत्ता के बारे में सोचा है जो अपने सर्वशक्तिमान संकेत से आकाश, पृथ्वी और समुद्र को चलाती है: उसकी साँस चलती है और जल बहने लगता है, वह पर्वतों को छूती है और वे धुआँ उठाने लगते हैं।»

«वह ईश्वर था, रूस, वह तुम्हारा ईश्वर था!»

— मिखाइल लोमोनोसोव, पीटर प्रथम के बारे में

झाँ-मार्क नातिए, «ज़ार पीटर प्रथम का चित्र»

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